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शारदा फर्जीवाड़े की आंच से अब सुलगने लगी है उनकी त्रिपुरा सरकार भी!


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


बंगाल में वाममोर्चा के नेता चाहे चिटफंड कांड को लेकर ममता और तृणमूल कांग्रेस को घेरकर वापसी की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हालात यह हैं कि शारदा फर्जीवाड़े की आंच से अब सुलगने लगी है उनकी त्रिपुरा सरकार भी। जैसे असम और बंगाल के मंत्रीगण आरोपों के घेरे में हैं, ठीक उसी तरह के आरोप लग रहे हैं त्रिपुरा के कामरेड मंत्रियों पर। दीदी को नया हथियार मिल गया।त्रिपुरा सरकार ने पहले ही इस प्रकरण पर सीबीआी की जांच की मांग कर दी है। लेकिन अब तक खामोश विपक्ष ने राज्य विधानसभा में अभूतपूर्व हंगामें के जरिये बता दिया है कि इस संकट से निपटना उतना आसान भी नहीं है माणिक बाबू के लिए। क्या अब दीदी की तर्ज पर वामपंथी भी अपने बचाव में केंद्र के खिलाफ ही गोलंदाजी करेंगे? वर्ष 2013 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चा को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ. इसी के साथ वाम मोर्चा पांचवीं बार सत्ता में आया है।शारदा समूह ने इस जनादेश पर सवालिये निशान खड़े कर दिये हैं।


चिटफंड संचालक कंपनी रोज वैली के जमाकर्ताओं के भविष्य को लेकर त्रिपुरा विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। स्पीकर का न्यायदंड भी हंगामे के बीच कुछ देर के लिए विपक्षी सदस्यों ने छीन लिया।राज्य के समाजकल्याण मंत्री पर आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ खुद चिटफंड में निवेश किया , बल्कि आम लोगों से भी उसी कंपनी में निवेश करने कोकहा।


शून्यकाल के दौरान विपक्ष के नेता रतन लाल नाथ ने मुख्यमंत्री माणिक सरकार से इस बारे में बयान की मांग की कि क्या रोज वैली के ग्राहकों की जमा राशि सुरक्षित है।


सरकार ने यह मामला वित्तमंत्री बादल चौधरी को सौंप दिया।माणिक सरकार ने कहा कि सारे तथ्य वित्त मंत्री के पास हैं। वित्तमंत्री ने कहा कि रोज वैली के पास आरबीआई या सेबी से कोई लाइसेंस नहीं मिला है। उन्होने कहा कि कंपनी आईन के मुताबिक इसका कारोबार चल रहा है।सेबी के नाम का इस्तेमाल कर रही थी यह कंपनी, जिसपर सेबी ने इसपर एक करोड़ का जुर्माना लगाया है।


 

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